गुरुवार, 26 जुलाई 2012

लेखक/रोहित कुमार 'हैप्पी'

जेबकतरे ने उसकी जेब काटी तो लगा था कि काफी माल हाथ लगा है, भारी जान पड़ती थी। देखा तो सब के सब काग़ज़ निकले। काग़ज़ों पर नजर डाली तो तीन कविताएँ, एक कहानी और दो लघु-कथाएं थीं। नोट एक भी न था।

जेबकतरे को लेखक की जेब काटने  का पछतावा हो रहा था।
 

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