बुधवार, 18 जुलाई 2012

कुँअर बेचैन/ अंगुलियाँ थाम के

अंगुलियाँ थाम के खुद चलना सिखाया था जिसे
राह में छोड़ गया राह पे लाया था जिसे

उसने पोंछे ही नहीं अश्क मेरी आँखों से
मैंने खुद रो के बहुत देर हँसाया था जिसे

छू के होंठों को मेरे मुझसे बहुत दूर गई
वो ग़ज़ल मैंने बड़े शौक से गाया था जिसे

मुझसे नाराज़ है इक शख़्स का नकली चेहरा
धूप में आइना इक रोज़ दिखाया था जिसे

अब बड़ा हो के मेरे सर पे चढ़ा आता है
अपने काँधे पे कुँअर हँस के बिठाया था जिसे

कोई टिप्पणी नहीं:

Birth Anniversary of Bhagat Singh भगत सिंह: ‘मत समझो पूजे जाओगे क्योंकि लड़े थे दुश्मन से!’

  वाकया तो खैर 1948 का है यानी 77 साल पुराना, लेकिन इस लिहाज से उल्लेखनीय है कि हमारे आज के सत्ताधीश, जो अब शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की याद और स...