रविवार, 22 जुलाई 2012

ऐ इन्सानो!/ गजानन माधव मुक्तिबोध

आँधी के झूले पर झूलो !
आग बबूला बन कर फूलो !

कुरबानी करने को झूमो !
लाल सवेरे का मूँह चूमो !

ऐ इन्सानो ओस न चाटो !
अपने हाथों पर्वत काटो !

पथ की नदियाँ खींच निकालो !
जीवन पीकर प्यास बुझालो !

रोटी तुमको राम न देगा !
वेद तुम्हारा काम न देगा !

जो रोटी का युद्ध करेगा !
वह रोटी को आप वरेगा !

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