शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

Vijay kishore manav/चोटें

दुखती है पीठ
पैर सीधा नहीं होता
सर्दी में पिण्‍डलियों पर
चिपक जाते हैं दर्द
उम्र भर की कमाई की तरह
दो बूढ़े बातें करते
गिर पड़ने से ऊंचे पेड़ की फुनगी से
या दुर्घटना के बाद महीनों प्‍लास्‍टर लगे रहने
कभी उम्र से दुखते उठा रहे पैर की कथा
आज़ादी की लड़ाई में कहीं नाम नहीं
जेल नहीं ले गए फिरंगी
टूटी पुलिस की लाठी
हड्डियों के मुकाबले
पचास बरस के दर्द को
सहलाते उस दूसरे बूढ़े की आंखें चमक उठती है ।

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