शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

VIjay Kishore Manav /जलती आँखें कसी मुट्ठियाँ

जलती आँखें,
कसी मुट्ठियाँ
भटक गई या हुई पालतू
इस इमारतों के
जंगल में

ऐसी दौड़
कि सर ही सर हैं
पाँवों के नीचे कंधे हैं
या तो आदमखोर नजर है
या फिर लोग निपट अंधे हैं
कौम कि
जैसे भेड़ बकरियाँ
पैदा होते हुई फ़ालतू
होने चली जिबह मकतल में

जिसे पा गए
उस पर छाए
सब में गुण हैं अमरबेल के
सीढ़ी अपनी, साँप और के
ऐसे हैं कायदे
खेल के
मिली जुली
हो रहीं कुश्तियाँ
ऊपर वाले, देख हाल तू
कोई नियम नहीं दंगल में

कोई टिप्पणी नहीं:

Birth Anniversary of Bhagat Singh भगत सिंह: ‘मत समझो पूजे जाओगे क्योंकि लड़े थे दुश्मन से!’

  वाकया तो खैर 1948 का है यानी 77 साल पुराना, लेकिन इस लिहाज से उल्लेखनीय है कि हमारे आज के सत्ताधीश, जो अब शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की याद और स...